लंबे समय से इप्टा की राष्ट्रीय समिति योजना बना रही थी कि विभिन्न राज्यों की विभिन्न भाषा-संस्कृति को प्रदर्शित करने वाला एक राष्ट्रीय नाट्य समारोह आयोजित किया जाए। यह योजना अंततः क्रियान्वित हो रही है और मुंबई मैसूर एसोसिएशन हॉल, माटुंगा में 20 मई से लेकर 27 मई 2026 तक 09 राज्यों के 06 भाषाओं में 15 नाटक मंचित किए जा रहे हैं। इस पूरे आयोजन की मेज़बानी मुंबई इप्टा द्वारा की जा रही है।

18 मई को इप्टा के राष्ट्रीय महासचिव तनवीर अख़्तर मुंबई पहुँचे। उनके नेतृत्व में मुंबई इप्टा की अध्यक्ष सुलभा आर्य और महासचिव मसूद अख़्तर द्वारा मुंबई प्रेस क्लब में शाम 4 बजे एक प्रेस कांफ्रेंस ली गई। इप्टा के पूर्व महासचिव जितेंद्र रघुवंशी की स्मृति को समर्पित इस राष्ट्रीय नाट्य समारोह में कैफ़ी आज़मी, शौक़त आज़मी, पृथ्वीराज कपूर, बलराज साहनी, ए. के. हंगल, उत्पल दत्त, शंभु मित्र, सलिल चौधरी जैसे महान और प्रसिद्ध कलाकारों के साथ-साथ 25 मई 1943 को मुंबई में इप्टा की स्थापना के बाद जुड़े असंख्य कलाकारों, साहित्यकारों, रंगकर्मियों, चित्रकारों और विचारकों की विरासत को भी याद किया जा रहा है।

राष्ट्रीय महासचिव तनवीर अख़्तर ने जितेंद्र रघुवंशी स्मृति राष्ट्रीय नाट्य समारोह के उद्देश्य और कार्यक्रम पर प्रकाश डालते हुए इप्टा की विरासत और कार्यों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया। सुलभा आर्य ने मुंबई इप्टा के वरिष्ठ कलाकारों को याद करते हुए उनसे प्रेरणा लेकर काम करने और अगली पीढ़ी को उसे सौंपने का संकल्प व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन करते हुए मसूद अख़्तर ने कैफ़ी आज़मी और शौक़त आज़मी को याद करते हुए मुंबई इप्टा की संरक्षक शबाना आज़मी द्वारा ‘कैफ़ी और मैं’ का विशेष नाट्य-प्रदर्शन कर आयोजन को सहायता करने की बात रेखांकित की। साथ ही मुंबई इप्टा के संरक्षक वयोवृद्ध रंगकर्मी निर्देशक एम. एस. सत्थ्यु को भी याद किया। पत्रकार साथियों को संबोधित करते हुए मुंबई इप्टा के निर्देशक रमेश तलवार और प्रसिद्ध संगीत निर्देशक कुलदीप सिंह ने इप्टा से जुड़ने की अपनी स्मृतियों को साझा किया। मुंबई इप्टा के युवा रंगकर्मी नीरज पांडे और विकास रावत ने अपने रंग-जीवन में इप्टा के महत्त्व को रेखांकित किया।

प्रेस कांफ्रेंस में तनवीर अख़्तर ने जानकारी प्रदान करते हुए बताया कि सात दिनों तक प्रति दिन एक या दो नाट्य प्रदर्शन के अलावा प्रसिद्ध नाट्य निर्देशक एवं इप्टा के अध्यक्ष प्रसन्ना द्वारा 21 मई को सुबह लगभग दो घंटे के लिए ली जाने वाली विशेष अभिनय प्रशिक्षण कक्षा, और प्रतिदिन सुबह होने वाली ‘निर्देशक से बातचीत’ भी इस आयोजन का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है और इसमें सभी को सादर आमंत्रित किया जा रहा है।

प्रेस कांफ्रेंस में इप्टा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और प्रसिद्ध अभिनेता अंजन श्रीवास्तव ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए इप्टा के पूर्व महासचिव जितेंद्र रघुवंशी, राकेश वेदा और वर्तमान महासचिव तनवीर अख़्तर द्वारा किए गए विस्तृत सांस्कृतिक कार्यों का उल्लेख करते हुए बताया कि इप्टा का काम सिर्फ़ नाटक करना नहीं, बल्कि विभिन्न प्रदेशों में गाँव-शहरों में जन-जन से संपर्क करना भी है। प्रेस कांफ्रेंस में राष्ट्रीय सचिव उषा आठले, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य चारुल जोशी के अलावा मुंबई इप्टा के युवा साथी रंजना श्रीवास्तव, निशा सिंह, सुमित, शाद अख़्तर के साथ अन्य साथी भी मौजूद थे। उपस्थित पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब इप्टा के पदाधिकारियों ने दिया।

राष्ट्रीय नाट्य समारोह का उद्देश्य एवं पृष्ठभूमि :
दिन-ब-दिन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियाँ बदतर होती जा रही हैं। इससे बाहर निकलने के लिए क्या किया जाना चाहिए, एकजुट होने के लिए आखिर कौन-सी रणनीति तय की जानी चाहिए, हरेक संवेदनशील व्यक्ति इस बात को लेकर चिंतित है। इतना तो साफ़ है कि सभी प्रगतिशील शक्तियों को एक साथ आना होगा और परस्पर प्रेम, सद्भाव, भाईचारा, समानता और शांति स्थापित करने के लिए प्रयास करना ही होगा, लेकिन कैसे? राजनीतिक गतिरोध के कारण केवल एक ही रास्ता है — ‘सांस्कृतिक राजनीति’ का। स्वतंत्रता-पूर्व संघर्ष की तरह सांस्कृतिक दृष्टि से नई-नई वैचारिक और प्रस्तुतीकरण की दिशाएँ तलाशनी होंगी। आज की परिस्थितियों को चुनौती दे सके, आम जनमानस के दिल और दिमाग को झकझोर कर जगा सके, इप्टा के तमाम महान कलाकारों और महाराष्ट्र के ही लोकशाहीर अण्णा भाऊ साठे, अमर शेख और गवाणकर की स्मृतियों तथा उनके कल्पनाशील संघर्ष को आगे बढ़ाने वाले प्रयास करना बेहद ज़रूरी है। सांस्कृतिक आंदोलन को अब नए पंखों की ज़रूरत है।
इस उद्देश्य को केंद्र में रखते हुए 2023 में (17 से 19 मार्च) डाल्टनगंज, झारखंड में आयोजित इप्टा के पंद्रहवें राष्ट्रीय अधिवेशन में नए नाटकों, गीतों, नृत्य और विविध कलाओं की नई प्रकार की प्रस्तुतियों के लिए एक नया प्रयोग किया गया। अधिवेशन में उपस्थित प्रतिनिधियों की पाँच कार्यशालाएँ आयोजित की गईं। इनके विषय थे – वैज्ञानिक दृष्टिकोण, जेंडर भेदभाव, कृषि-संकट, पर्यावरण, सामाजिक न्याय, आर्थिक असमानता और सांप्रदायिकता। इन कार्यशालाओं में अनेक कवि-लेखक, चिंतक, अभिनेता, वैज्ञानिक, एक्टिविस्ट और ललित कलाओं से जुड़े सभी वर्गों-वर्णों के कलाकारों ने भाग लिया। कुछ नाटकों की स्क्रिप्ट, गीत और कविताएँ वहीं तैयार करके सबके सामने प्रस्तुत की गईं। आदिवासी चित्रकारों ने चित्र बनाए। वहाँ यह निर्णय लिया गया था कि अब इन विषयों पर गहराई से काम करके नए नाटक तैयार होने के बाद एक राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव आयोजित किया जाएगा। तब से लेकर अब तक अनेक प्रकार की गतिविधियाँ और आंदोलन आयोजित किए गए हैं। इनमें युवा कार्यशालाएँ और “ढाई आखर प्रेम” पदयात्रा राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित की गईं। पूरे तीन वर्षों के बाद अब इप्टा की राष्ट्रीय समिति, मुंबई इप्टा की मेज़बानी में, आगामी 20 मई से 27 मई 2026 तक उपरोक्त विषयों पर केंद्रित नाट्य महोत्सव आयोजित कर रही है।

इसमें विभिन्न राज्यों के लगभग 15 नाटक प्रस्तुत किए जाएंगे। अधिकांश नाटक नए सिरे से लिखे गए हैं। प्रत्येक राज्य अपनी-अपनी क्षेत्रीय भाषा में नाटक प्रस्तुत करेगा। हिंदी, तमिल, मराठी, पंजाबी, ओड़िया और उर्दू भाषाओं में होने वाले इस बहुभाषी नाट्य महोत्सव के लिए पिछले छह महीनों से तैयारी चल रही थी, जो अगले आठ दिनों में कार्यरूप में साकार होते हुए देखी जा सकती है।

कार्यक्रम की रूपरेखा :
मैसूर एसोसिएशन हॉल माटुंगा में इप्टा द्वारा आयोजित बहुभाषी राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव का उद्घाटन कार्यक्रम 20 मई को शाम 6.30 से आरंभ होगा। शाम 7.30 बजे से मुंबई इप्टा की ओर से कुलदीप सिंह और टीम कबीर पर सांगीतिक कार्यक्रम ‘वाको नाम कबीर’ प्रस्तुत करेंगे। इस कार्यक्रम का संचालन करेंगे प्रसिद्ध अभिनेता अतुल तिवारी।
21 मई को दिल्ली इप्टा का हिंदी नाटक ‘गोह’ (आदिवासी कवियों वंदना टेटे, अनुज लगुन तथा जसिंता केरकेट्टा की कविताओं पर केंद्रित – लेखन व निर्देशन : दिल्ली इप्टा) और तमिलनाडु इप्टा का तमिल नाटक ‘Uyarntha Theerppu’ (लेखन व निर्देशन : आनंद बसु) क्रमशः शाम 6.00 और 8.00 बजे प्रस्तुत होगा।
22 मई को नाशिक इप्टा का मराठी नाटक ‘उपटसुंभ’ (लेखक : योगेश गोवर्धन, निर्देशन : मुकेश काळे) शाम 7.00 बजे प्रस्तुत किया जाएगा।
23 मई को तीन नाटक होंगे – कपूरथला पंजाब इप्टा का पंजाबी नाटक ‘kende Vich Khileya Gulaab’ (लेखक : डॉ. दविंदर कुमार, निर्देशन : इंद्रजीत रूपोवाली), इंदौर मध्य प्रदेश इप्टा का ‘तराना-ए-आज़ादी’ (लेखक : जया मेहता एवं विनीत तिवारी, निर्देशन : गुलरेज़ ख़ान वि सारिका श्रीवास्तव) क्रमशः शाम 5.00 और 8.00 बजे मैसूर एसोसिएशन में प्रस्तुत होंगे, तथा तीसरा नाटक ‘कैफी और मैं’ (लेखक : जावेद अख्तर, निर्देशन : रमेश तलवार) मुक्ति ऑडिटोरियम अंधेरी पश्चिम में शाम 4.30 और 7.30 बजे प्रस्तुत किया जाएगा।
24 मई को शाम 7 बजे लखनऊ (उत्तर प्रदेश) इप्टा का भारतीय संत कवयित्रियों के जीवन पर आधारित हिंदुस्तानी नाटक ‘सपना मेरा यही सखी’ (लेखक : राजेश जोशी, निर्देशन : वेदा राकेश) प्रस्तुत होगा।
25 मई को इप्टा के स्थापना दिवस पर शाम 5.30 बजे स्थापना दिवस कार्यक्रम के बाद कात्यायनी व थ्री आर्ट्स क्लब के दो हिंदुस्तानी भाषा के नाटक ‘बलराज साहनी : मेरी फिल्मी आत्मकथा’ (लेखक : बलराज साहनी, रूपांतरण व निर्देशन : निधिकांत पांडे) और ‘आनंद ही आनंद’ (लेखन, निर्देशन व प्रस्तुति : सोहैला कपूर) क्रमशः शाम 6.00 बजे और 8.30 बजे प्रस्तुत होंगे।
26 मई को इप्टा ओडिशा का ओड़िया नाटक ‘Ek Nua Sakalara Apekshya Re’ (लेखक : बिधू भूषण पंडा, निर्देशन : बिक्रम केशरी जना) और राजस्थान इप्टा का कृष्ण चंदर की कहानी पर आधारित हिंदी नाटक ‘थाली में बैंगन’ (लेखन व निर्देशन : विकास कपूर) क्रमशः शाम 6.00 और 8.00 बजे प्रस्तुत होंगे।
27 मई को समापन दिवस पर भी दो नाटक होंगे – पटना (बिहार) इप्टा का हिंदी नाटक ‘कोर्टमार्शल’ (लेखक : स्वदेश दीपक, निर्देशक : तनवीर अख्तर) शाम 5.00 बजे और इप्टा मुंबई का हिंदी नाटक ‘हम परवाने’ (शहीद अशफाकुल्लाह ख़ान वारसी के जीवन पर आधारित) (लेखक : सागर सरहदी, निर्देशक : रमेश तलवार) रात 8.30 बजे प्रस्तुत होगा। उसके बाद 9.15 बजे जितेंद्र रघुवंशी राष्ट्रीय नाट्य समारोह का समापन कार्यक्रम संपन्न होगा।

मैसूर एसोसिएशन के कार्यक्रम स्थल पर इप्टा के इतिहास, गतिविधियों और प्रस्तुतियों पर प्रदर्शनी, परिसंवाद, जनगीत-गायन और नाट्य-समीक्षा के कार्यक्रम भी होंगे। नाटक के टिकट कार्यक्रम-स्थल पर सुबह 10 बजे से रात 8.00 बजे तक उपलब्ध होंगे।
